शुक्रवार, 3 अप्रैल 2009

मैं समय हूं......

मैं समय हूं......
मुझे शायद अपने परिचय की आवश्यकता नहीं है, आप सब यही कहेंगे कि सभी मुझे अच्छी तरह पहचानते हैं, परन्तु बहुत ही कम लोग हैं जो मुझे जान पाते हैं या मेरे साथ चल पाते हैं। मैं अपनी डगर चलता रहता हूं, और लोग पीछे छूटते जाते हैं।
दरअसल, लोग पीछे नहीं छूटते, इसके बजाए मैं यह कहूं तो ज्यादा ठीक होगा कि लोग मुझ तक पहुंच नही पाते हैं। इसकी व्याख्या मैं बाद में करूंगा क्योंकि यह एक पूरा अध्याय है, और इसे गहराई से समझने की आवश्यकता है।
मैं आपसे मुख़ातिब हूं, ताकि मैं आपको मेरे साथ तक लेकर आ सकूं। मैं आपको अपनी अब तक की यात्रा का विवरण दे सकता हूं, आपको अपने समय से (यानि कि मुझसे) परिचित करा सकता हूं, आपको आईना दिखा सकता हूं।
आप मेरी कहानियां, मेरी बातें सुनकर अपने आपको समझने की, अपने समय को समझने की कोशिश कर सकते है या फिर अपनी जिग्यासाओं, अपने सवालों, अपनी उलझनों को मुझ तक पहुंचा सकते हैं, और फिर आप अपनी गुत्थियों को यहां सामान्यीकृत रूप से खुलता हुआ देख सकते हैं। यहां की टिप्पणियां और ईमेल इसका जरिया बन सकते हैं। तो अपने समय से, यानि कि मुझसे संवाद स्थापित कीजिए।
मै समय हूं.....
मैं यहीं हूं....मैं कहीं नहीं हूं.....

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