शनिवार, 10 मार्च 2012

योग्यता की संरचना ( structure of ability )

हे मानवश्रेष्ठों,

यहां पर मनोविज्ञान पर कुछ सामग्री लगातार एक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत की जा रही है। पिछली बार हमने व्यक्ति के वैयक्तिक-मानसिक अभिलक्षणों की कड़ी के रूप में ‘योग्यता’ के अंतर्गत योग्यता की परिमाणात्मक अभिलाक्षणिकताओं को समझने की कोशिश की थी, इस बार हम योग्यता की संरचना पर चर्चा करेंगे ।

यह ध्यान में रहे ही कि यहां सिर्फ़ उपलब्ध ज्ञान का समेकन मात्र किया जा रहा है, जिसमें समय अपनी पच्चीकारी के निमित्त मात्र उपस्थित है।



योग्यता की संरचना
( structure of ability )

प्रत्येक सक्रियता ( श्रम, अध्ययन, खेलकूद, आदि ) मनुष्य के मानसिक गुणों ( बुद्धि की विशेषता, संवेगात्मक-संकल्पात्मक क्षेत्र, संवेदी गतिशीलता ) से बहुत कड़ी अपेक्षा करती है। ये अपेक्षाएं कभी किसी एक गुण तक सीमित नहीं रहतीं, भले ही वह विकास का बहुत ऊंचा स्तर प्राप्त कर चुका हो। इस मत में कि कोई भी एक मानसिक विशेषता कार्यकलाप की उच्च उत्पादनशीलता प्राप्त कर सकती है और समस्त योग्यताओं का स्थान ले सकती है, वैज्ञानिक सत्य नहीं है। योग्यताएं मानसिक गुणों का कुल योग है तथा उनकी बहुत ही संजटिल संरचना होती है

योग्यताएं तथा सक्रियता
( abilities and activity )

मानसिक गुणों के समुच्चय की संरचना को, जो योग्यताओं के रूप में प्रकट होती हैं, ठोस सक्रियता की अपेक्षाएं निर्धारित करती हैं और वह भिन्न-भिन्न सक्रियताओं में भिन्न-भिन हो सकती हैं।

अतः गणित के वास्ते योग्यता की संरचना में, उपलब्ध तथ्य-सामग्री के अनुसार, नाना विशिष्ट योग्यताएं शामिल हैं : गणितीय सामग्री का सामान्यीकरण ( generalization ) करने की योग्यता, गणितीय तर्कणा की प्रक्रिया और तदनुरूपी गणितीय संक्रियाएं करने की योग्यता, चिंतन की प्रक्रिया को उल्टी ओर मोड़ने की, यानि प्रत्यक्ष से विलोम तर्कणा की ओर सुगमतापूर्वक बढ़ने की योग्यता, गणितीय समस्याओं के समाधान में चिंतन की प्रक्रियाओं में सुनम्यता ( good flexibility ), आदि। साहित्यिक योग्यताओं की संरचना सौंदर्यबोध के विकास के उच्च स्तर, विविधतामय बिंब-विधान, भाषा के बोध,  प्रचुर कल्पना-शक्ति, लोगों की मनोदशा में गहरी रुचि, आत्म-अभिव्यक्ति की आवश्यकता, आदि की पूर्वकल्पना करती है। संगीत, अध्यापन, डिज़ाइन, चिकित्साशास्त्र, आदि के लिए भी योग्यताओं का अत्यंत विशिष्ट स्वरूप होता है।

मानसिक संक्रियाओं की प्रतिपूर्ति ( compensation ) चाहे कितनी ही व्यापक क्यों न हो, व्यवसायगत योग्यताओं की विशिष्ट संरचनाओं का ज्ञान होना एक अध्यापक के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है, जिसे अपने कार्य में उनका आश्रय लेना चाहिए और उनके अभाव में अथवा अल्पविकास की सूरत में इस कमी को पूरा करने के लिए बच्चे में व्यक्तित्व के अन्य गुणों का गठन करना अध्यापक के लिए नितांत आवश्यक है।

व्यक्तित्व की विशेषताओं तथा गुणों में से, जो विशिष्ट योग्यताओं की संरचना के घटक हैं, कुछ का प्रमुख ( main, major ) तथा कुछ का आनुषंगिक ( auxillary ) स्थान होता है। इस तरह शिक्षाशास्त्रीय योग्यताओं की संरचना में मुख्य गुण ये होंगे : शिक्षाशास्त्रीय व्यवहारकुशलता, प्रखर प्रेक्षण-शक्ति, बच्चों से कड़ी अपेक्षाओं के साथ उनके प्रति प्यार की भावना के साथ संयोजन, दूसरों को ज्ञान के अंतरण की आवश्यकता, एक पृथक ( different ) आधार जैसी संगठनात्मक योग्यताओं का समुच्चय, आदि। आनुषंगिक गुणों में कला-कौशल, वक्तृत्व-क्षमता, आदि शामिल हैं। स्वभावतः, शिक्षाशास्त्रीय योग्यताओं के प्रमुख तथा आनुषंगिक अवयव मिलकर एक पूर्ण समष्टि बनते हैं, जो सक्षम अध्यापक तथा निजी गुणों के अनुपम समुच्चय से युक्त मौलिक व्यक्तित्व के रूप में मनुष्य की अभिलाक्षणिकता ( characteristics ) होती है।

सामान्य तथा विशेष योग्यताएं
( general and specific abilities )

भिन्न-भिन्न योग्यताओं की ठोस मनोवैज्ञानिक अभिलाक्षणिकताओं का विश्लेषण करते समय हम अधिक सामान्य गुणों को, जो एक नहीं, अपितु कई प्रकार की सक्रियता की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं, तथा विशिष्ट गुणों को, जिनकी एक ही प्रकार की सक्रियता के लिए आवश्यकता पड़ती है, पहचान सकते हैं। कतिपय व्यक्तियों की योग्यताओं की संरचना में ये सामान्य गुण अत्यधिक ज्वलंत रूप से प्रकट होते हैं, जो यह कहने की संभावना देते है कि भिन्न-भिन्न कार्य तथा व्यवसाय, जिनकी परिधि व्यापक होती है, करने में समर्थ इन लोगों में चहुंमुखी योग्यताएं हैं।

इन सामान्य योग्यताओं तथा गुणों को, विशेष योग्यताओं तथा गुणों के मुकाबले में नहीं रखना चाहिए, जैसा कि कुछ मनोविज्ञानी प्रयास करते हैं कि ‘सामान्य बुद्धि’ को एक रहस्यमय कारक के रूप में अलग से चुन दिया जाए, जिसे केवल बुद्धि-परीक्षाओं की सहायता से प्रकट किया जा सकता है।



इस बार इतना ही।

जाहिर है, एक वस्तुपरक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गुजरना हमारे लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है, हमें एक बेहतर मनुष्य बनाने में हमारी मदद कर सकता है।

शुक्रिया।

समय

3 टिप्पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

dheerendra ने कहा…

योग्यताएं मानसिक गुणों का कुल योग है तथा उनकी बहुत ही संजटिल संरचना होती है।

MY RESENT POST ...काव्यान्जलि ...:बसंती रंग छा गया,...

कविता रावत ने कहा…

bahut sundar sarthak post...

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